इस दीवाली का नाम क्या है?
इस दीवाली का काम क्या है?
मेरी माँ की भीगी पलकों से बहती खुशियों की है दीवाली.
गरम गरम फुल्के बनाती है जिस पर वो,
उस ही चुहले से रोशन दीवाली.
डाँट पढ़ने के बाद किए लाइट ह्यूमर से निकली दबी हसी की दीवाली.
मेरे पापा के वेस्पा स्कूटर की टूटी हेडलाइट,
उनके थॉट बब्ल्स में बने यूरेका बल्ब की दीवाली,
ऐसे ही हज़ारों थॉट बब्ल्स में पनपे सैकड़ों यूरेका बल्ब्स,
आज तक मेरा रास्ता जगमगा रहे है.
उनके चेहरे पर सदा रहेने वाले तेज की है यह दीवाली.
मेरी नानी की कहानियों में बसी सर्दियों की धूप सी दीवाली.
उसके माथे पर चंदन से बने सूरज की दिवाली.
ना जाने नानी का तजुर्बा था, एक भ्रम था या मेरी कल्पना,
उसके सर के पीछे बनने वाले सुनहरे हेलो है यह दीवाली.
मेरे भईया की आँखों में आज तक छिपे एक भोले ब्च्चे की दीवाली
मुझे दी गई उसकी हिदायतें
आसमान में रंगीन आतिशबाज़ियाँ
मेरे लिए तो है इन्नयतें
मेरी नादानियों का अंधेरा मिटाने वाले इस जुगनू की है दीवाली
हर फ्रेंड ज़रूरी होता कहते है टीवी वाले
हर फ्रेंड ज़रूरी होता कहते है टीवी वाले
मेरी सहेली की बातें, मोमबत्ती की छ्टपटाती लौ सी
कभी सच का अनार तो कभी झूठ के पटाखे चलाये वो
कल की झाँसी की रानी आज रो के,
मेरी गोदी में सो रही है वो.
कल क्या बन जाएगी?
मुझे हंसाएगी?
मेरे एक्स बाय्फ्रेंड को कॉल कर चार खरीखोटी सुनाएगी?
या तीन हफ्ते बाद उसके साथ ही गो-आउट करती नज़र आएगी?
मेरी मोमबत्ती उस फुस बम्ब की फुलझड़ी बन जाएगी.
फिर शयाद पछताएगी.
सुबह के भूले की शाम को घर लौट आने की है दीवाली.
अंधेरे के बाद उजाले सा मेरा दोस्त,
आँखों में खटकता था कुछ देर मेरी.
उसने मुझे सर झुकाना सिखाया है,
कभी मेरी आँखों में पानी लाया है,
मेरी ईगो के रॉकेट को उसने मज़ाक में उड़ाया है,
उसके साथ फोन पर किए लाखों इंटेलिजेंट डिस्कशन्स से एनलाइटंड दीवाली.
हर फ्रेंड सिर्फ़ ज़रूरी नही; ये मेरा गरूर है.
मेरे दोस्त मेरी मजबूरी है.
उनके बिना दीवाली भी अधूरी है
मन में फूटे हाइड्रोजन बंब की है यह दीवाली
पानी पड़ी कुछ नंगी तारों की दीवाली.
पिछले साल से पड़ी है लाईटों की लड़ी,
उसको सॉफ कर लगाते है नये मकान में.
चिपकाते है अपने जज़्बातों की डेकोरेशन्स,
एक नये से हार्ट में.
हाथ में हाथ डाले,
दुआ की इस बार कोई दुख ना हो पार्ट में.
सोचें की यह रिलेशन्षिप तो स्टेडी हो,
और अगर ब्रेक अप होना है तो हो,
लेकिन अगली दीवाली तक
एक नये दिल का मकान रेडी हो.
जलते दिलों की दीवाली
रातों के सुख चैन फरार की दीवाली
मेरे लेटेस्ट पाँचवे प्यार की दीवाली
इस दीवाली का नाम क्या है?
इस दीवाली का काम क्या है?
जब आप हर रात लौटते है ऑफिस से घर .
मुस्कुराते चेहरों का आपके मूड पर वो सूथिंग असर.
उस समय का नाम है दीवाली
इसका नाम अन्ना है और दिल्ली मेट्रो भी.
जब हम वर्ल्ड कप जीते तब भी मनी दीवाली थी.
हर सुबह, रात को हरा कर हमारी होप बढ़ती है,
क्या वो भी एक किस्म की दीवाली नही?
हर वो पल जिसमे ग़लत पर भारी पड़े सही,
क्या वो भी एक किस्म की दीवाली नही?
यह एक त्योहार नही, एक एहसास है.
ध्यान से देखो तो हर दिन दीवाली
और हर इंसान भगवान राम सा ख़ास है.

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